कोई अब तक रो रहा हैं (गजल)

तरुणा डहरवाल

कोई अब तक रो रहा हैं (गजल)
(159)
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सारांश

कैसी कैसी यादों की बहार हैं तुम संग, बीते पलो में दौर-ए-इश्क़ में जो ना होना था, अब वो भी हो रहा हैं //
S.K. Patel
wow wonderful gazal.....
अनिल कुमार
बहुत सुन्दर रचना 🙏🙏🙏💐
दीपक चौधरी
वाह, खबर के रस्ते, शिकायत की दहलीज होते हुए प्रश्न तक जाती रचना।
રાકેશ ઠાકર
सुंदर भाव प्रदर्शित करती है अपनी गज़लों में आप
Gokuldas Yeshikar
रचना तो सुंदर है लेकिन अवकाश ( स्पेस ) देना भूल जाती है आप I
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