कैफे काॅफी डे

अंकुर त्रिपाठी

कैफे काॅफी डे
(12)
पाठक संख्या − 2366
पढ़िए

सारांश

हम दोनो एक दूसरे का हाथ थामे दिल्ली के काॅनाट पैलेस के CCD की सीढियो पर चढे जा रहे थे । हाथ इतनी मजबूती से थामे थे जो एक पल भी छूटने को तैयार नही था । अंदर घुसते ही नजरे दौङायी तो दायी ओर की सीट खाली पायी । "चलो उधर बैठते है !" मैने परी से कहा । मै और वो चल दिये ....जहाँ हम दो बैठने वाले थे । बैठते ही , मैने पानी पिया क्योकि अपने रूम विश्वविद्यालय मैट्रो स्टेशन से राजीव चौक तक के सफर मे मै थक चुका था । "तो तुम अब घर जा रहे हो ।" परी ने कहा । मै - हाँ, अब नया सफर तय करना है जो मेरे पिता ने निर्धारित किया है ! " हमममम , ठीक है !" मायूस भरे चेहरे से परी ने कहा ।..............
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.