कुछ यादे अब जिंदगी बन गयी

प्रज्ञा"अस्मि" अग्रवाल

कुछ यादे अब जिंदगी बन गयी
(24)
पाठक संख्या − 1479
पढ़िए
Sumedha Prakash
सुंदर रचना
Deepak Batham
Heart touching poem very good:)
Satyendra Kumar Upadhyay
राष्ट्र भाषा का पूर्ण रूपेण सम्मान न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
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Prasad Patil
Excellent poetry and very heart touching
Surender Saharan
काबिलियत झलकती है एक एक अलफाज से  पूरे कायनात के दद॔ को चंद लफ्जो में ही बयां कर दिया बहुत खूब
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