कुछ यादे अब जिंदगी बन गयी

प्रज्ञा"अस्मि" अग्रवाल

कुछ यादे अब जिंदगी बन गयी
(21)
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Satyendra Kumar Upadhyay
राष्ट्र भाषा का पूर्ण रूपेण सम्मान न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
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Surender Saharan
काबिलियत झलकती है एक एक अलफाज से  पूरे कायनात के दद॔ को चंद लफ्जो में ही बयां कर दिया बहुत खूब
vivek sharma
Very nice poem..simple and deep..good..keep writing..
Anita Choubey
Su vaat chhe.... awesome......
Deepak Batham
Heart touching poem very good:)
Prasad Patil
Excellent poetry and very heart touching
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