कुंडली

गोविन्द उपाध्याय

कुंडली
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सारांश

कमरे में मुझे लेकर पांच लोग थे । उन चारों में एक महिला थी । दूसरा उसका पति था । दोनों मेरी तरह अधेड़ थे । शेष दो नौवजवान थे । एक महिला का पुत्र था और दूसरा देवर था । बारह बाई बारह का कमरा था । नीचे ...
सुप्रिया दुबे
बहुत सुंदर कहानी लिखी है सर जी।
Geeta Gupta
मर्मस्पर्शी रचना
ajay
अच्छी सीख कहूँगा।बेटियों के पिताओं को बेचारा होने और दब्बूपन छोड़ने की सलाह देती कहानी।
Jyoti Patidar
achchhi kahani . bas Bharatiya samaj beti Ko bojh samjhana band kar de to bahut sari pareshaniya khatm ho jaye
rani
नि:शब्द
Deepak Dixit
क्या बात है
Rita Pandey
bahut acchi .akdm sahi
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