किस्सागोई-1.1: सेठ मंशाराम की मंशा

चन्द्र लक्ष्मी

किस्सागोई-1.1: सेठ मंशाराम की मंशा
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सारांश

मंशाराम सेठ व्यापार और परिवार की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर देशाटन के लिए जाना चाहते हैं। परिवार वाले बिना सेवक के उन्हें भेजना नहीं चाहते।
Rishabh Shukla
nice
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डॉ गोविन्द पाण्डेय
मस्त है पर इतने छोटे छोटे अपडेट है कि इससे चिढ़ कर सिर्फ एक ही स्टार दे रहा हूँ । छोटा अपडेट बिल्कुल भी अच्छा नही लगता है । एक छोटी सी कहानी को केवल कई भागों में दिखाने के लिए , और यह प्रदर्शित करने के लिए कि लेखक ने इतनी अधिक रचनाये लिखी है , इतने छोटे छोटे अपडेट में इस मजेदार कहानी को प्रस्तुत किया जी । यह एक जबरजस्त दोष है इसलिये सिर्फ एक ही स्टार दूंगा जी । अपना यह दोष सुधारिये जी । तब स्टार की संख्या पांच खुशी से देंगे जी ।
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Pawan Pandey
बहुत ही रोचकता लिए हुए है। बहुत सुंदर।
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Mukul Bhushan Hajela
very very nice
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Nitin Sharma
पूरी कहानी कब लिखेंगे आप।।
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Vikas Bansal
bhai pura parna hai kaha milega
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बृजभूषण खरे
बहुत अच्छा.
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