किस्सागोई-1.1: सेठ मंशाराम की मंशा

चन्द्र लक्ष्मी

किस्सागोई-1.1: सेठ मंशाराम की मंशा
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सारांश

मंशाराम सेठ व्यापार और परिवार की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर देशाटन के लिए जाना चाहते हैं। परिवार वाले बिना सेवक के उन्हें भेजना नहीं चाहते।
दुर्गा प्रसाद
बहुत सुन्दर।👌👌
Rishabh Shukla
nice
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Pawan Pandey
बहुत ही रोचकता लिए हुए है। बहुत सुंदर।
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Mukul Bhushan Hajela
very very nice
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Nitin Sharma
पूरी कहानी कब लिखेंगे आप।।
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Vikas Bansal
bhai pura parna hai kaha milega
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बृजभूषण खरे
बहुत अच्छा.
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