किसान

Anuj Bhandari

किसान
(2)
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सारांश

जिंदगी जिते हम  इनसान ,मेहनत करता ये किसान भूख मिटाते हम इनसान,भूख से मरते ये किसान मखमल बिस्तर मे सोते हम इनसान, मच्छरों के साथ सोता वो किसान कुछ करते नही, दिखाते अपनी शान,सब कुछ करके भी शांत रहता  ...
Maneet
very beautiful poem
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आईदान सिंह
बहुत सुंदर भाव👌👌👏
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