काश

Arti Anand

काश
(132)
पाठक संख्या − 36750
पढ़िए

सारांश

व्यस्त ज़िन्दगी में कभी 2 खामोशी भी सुन लेना जरूरी हो जाता . पर अफ़सोस कई बार हम ऐसा नहीं करके ज़िन्दगी भर एक काश का अफ़सोस झेलते ...
DrDiwakar Sharma
कैसी कलयुगी. माँ इसके पास अपनी बच्ची की बात सुनने का समय.ही नहीं है. न किटी पार्टी से कुछ मिनट का अवकाश।काश बच्ची की बात पर गौर किया होता तो बच्ची आज जीवित होती ःधिक्कार है ऐसी माँऔँ पर।शिक्षाप्रद कहानी।
Shashi Mishra
बच्चों की खामोशी को पहचान कर उस पर अमल करना चाहिए।इस तरह की घटनाओ में मां बाब भी लापरवाही के कारण जिम्मेवार हैं।सतर्कता ही बचाव है। कहनी का अंत जल्दबाजी में खत्म करना रहा अंत अच्छा हो सकता था
Suman Chaudhary
मर्म स्पर्शी कहानी
Manju Gupta
ufff or Kash hi rah jate he🤔🤔😢😢😢
Nisha Aiya
achhi h . padkar sabak lena chahiye.
prabhabansal
bacho Ko kabhi najar andaaj na kare
Shalu Goyal
aag lage aisi kitty parties ko
Rashmi Asthana
Very sad heart touching story
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.