काश! तू न मिला होता # ओवुमनिया

अनिता तोमर

काश! तू न मिला होता # ओवुमनिया
(28)
पाठक संख्या − 200
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सारांश

काश! तू न मिला होता.... तो दुनिया ही कुछ और होती, न ख़्वाब मेरे दिन-रात जलते न आँखें मेरी ये रोती।     दिल के अरमान मेरे दब गए     कहीं गहरी चोट खाकर,     उम्मीद की किरण भी छिप गई     घनघोर घटा में ...
अरुणा जांगड़ा
utam rachna anita ji....aapki bhawnaye is poem me saf jahlakti h.... bahut sunder rachna....🙏
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प्रशांत सिंह (सनी )
काश ये ना होता , काश वो होता... हम तो कहते हैं काश , ये काश ही ना होता जो हुआ हो चुका, दर्द मिला, खो चुका अब हमे काश कि आस में परेशान नहीं होना ज़िन्दगी जीनी है और हर ख्वाब है संजोना...
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Vijay Kumar Soni
चाहते हैं जिंदगी की किताब से कुछ पन्ने फाड़ने सभी, पर ये जिंदगी है, गुजरा वक्त न आता कभी।
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Nilesh Kumar
bahut khub 👍
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Rajendra Kumar Shastri 'Guru'
बहुत ही सुन्दर विरह कविता। ये रचना बिना पढ़े कैसे रह गई पता ही नहीं चला☹️☹️
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sushma gupta
beautiful lines, 👌👌
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Dr.vijendra Singh
*सुन्दर अभिव्यक्ति *** *** तेरे साथ का मतलब जो भी हो , तेरे बाद का मतलब कुछ भी नही ***********
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रजनी
काश वक़्त खुद को दोहराए कुछ और पंक्तिया पन्ने लिखे जाएं तू भी उसी दौर से गुजरे तू भी रोये टूटे बिखरे फड़फड़ाए तेरे दिल में उबाल आए खटक खटक के तू रत्ती भर रह जाए तब तू मेरे रास्ते से गुजरे और मैं तेरे जेहन में मैं उबरु मेरी सशक्त नज़रो में तू तुच्छ नज़र आए
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ईश्वर सिंह बिष्ट
जीवन में कुछ लोग ऐसे मिलते हैं जो देह को क्या आत्मा तक को कुचल देते हैं ।
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