कामवाली की तलाश में

जितेन्द्र 'जीतू'

कामवाली की तलाश में
(72)
पाठक संख्या − 19947
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सारांश

हिन्दी साहित्य के सबसे उम्दा व्यंगकार श्री जितेन्द्र 'जीतू' जी का ये व्यंग्य संग्रह समसामयिक विषयों पे एक नयी तरह से प्रकाश डालता है। हर एक व्यंग्य ना केवल पाठकों को मुस्कुराने पर मजबूर करता है, बल्कि साथ ही साथ सोचने के लिये बाध्य भी करता है।
Raj Ji
bahu agar pari bhi hogi par aasman se nahin utari hogi. what a line. maja aagaya.
Ranjna Dongre
Bhut hi achhi lagi apki Talash
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Gurash Gurash
bahut badiya☺☺☺☺
Umesh Kumar
kuch to Bhut hi behtarin h, kuch aosat h.. par overall sab acha h
Hemant MOdh
जीतू जी, जीतें रहों हम जैसे "बैचारे पत्नी वालें" के सारे स्वर अंगो से यही आवाज़ें आ रहीं हैं...जीतू जी की कथा "कामवाली" पढ़ कर, मन को शान्ति प्रदान हुईं, आपकी कर क़लम से ऐसी ही कोपलें निकलती रहेंगी तो उन्हें आंखों के रस्ते दिल उतारतें रहेंगे, ओर आपकी कर क़लम कों प्यार करते रहेगें ! आज के लिए बस इतना ही...! आपका अपना ही हेमन्त मोढ़ " इन्दोरीलाल" अब आपको भी मेरी कथा... "प्यार का एहसास" ओर व्यथा "इन्दोरीलाल" पढ़ कर, प्रतिक्रिया दें कर हिसाब पूरा करना पड़ेगा, नी तो आपके घर का पता, पता करके आपके यहां जिमने आ जाऊंगा... इत्ती सी बात कई के अंगूठे को विश्राम देता हूं...!
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Davinder Kumar
जितेंद्र जी आपकी यह कथा हास्य से भरपूर है
Bala
वाह ,,,,,
Rahul Goswami
मजेदार
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