कानाफूसी

ओमांश

कानाफूसी
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सारांश

श्यामपुर की सड़कों में चर्चाओं का बाजार गर्म था। चर्चा का कारण थी एक लड़की और चर्चा के केन्द्र में थी लड़की की मां। बर्तन वाला चन्दू बोला- मां के लक्षण ई ठीक नी थे। बेटी तो कुकर्म करेगी ही। होटल वाला अम्बे बोला- रघु भी इसकी मां के कुकर्मों की वजअ से इ नवान खाकर मरा।
सुबोध चतुर्वेदी
दुःखद, जीवन की विडंबना
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Ajay Kumar Patidar
बहुत खूब । बेहतरीन रचना।
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Blogger Akanksha SAXENA
बहुतखूब
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Suraj Katyal
thanks for new...intersting creativity
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Deepika Muktibodh Anvekar
बहुत सुंदर ,प्रशंसनीय
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रश्मि सोनी
गरीबी के संघर्ष,स्त्री की दयनीय स्थिति और किशोर मन को एक ही कहानी द्वारा दर्शाने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई।
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