कातिल कौन ?

वंदना गुप्ता

कातिल कौन ?
(183)
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सारांश

“क्योंकि औरत होना पहला गुनाह है” “उसका दूसरा गुनाह है बाप दादा भाइयों की मिलकियत बन ज़िन्दगी गुजारना और अपने बारे में कभी न सोचना” “उसका तीसरा गुनाह है गूंगी गाय सी हंक जाना जहाँ चाहे वो हाँक दें ...
Tulsiram JaiSwal.
बहुत सुंदर रचना लेकिन जब तक औरतें ही अपनी बहू बेटी को भारत समझती रहेगी तब तक बेटियां इसी तरह भर्ती रहेंगी आदमी तो आज भी औरत का गुलाम है चाहे वो मां या और कोई जैसे शालिनी की सांस भाभीयां आदि धन्यवाद आपका आगे भी इसी श्रेणी की रचना पढ़ने मिलती रहेंगी इसी आशा के साथ
Ruchika Khanna
U r right . U have shown the real image of the सोसाइटी.
Deepak Rathor
अति दुखद समाचार है।
Archana Yadav
bahut hi marmik chitran kia hai aapne
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Alka Kalra
very nice
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पूर्णेन्दु गुप्ता
यह रचना लिखने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई
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लायबा अंसारी
Jo kuch aapny likha wo to bht hi km hy....hamare aas pas hi na jany kitni mahilaaye isse bhi zyada atyachar seh rahi hy.......kash maa baap beti ko vida krty samay ye kahy k susraal ko apna ghr samjhna lekin koi atyachar mt sehna ..mayeky ka darwaza tumhare liye hamesha khula hy....kash..........bht achcha lekhan.....shubhkaamnaye
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Bali Kashyap
अधिकतर औरतों की ऐसी ही जिन्दगी बीत रही है हमारे देश में even पढ़ी लिखी नौकरी पेशा औरतो को भी ये सब झेलना पड़ता है कि ये overdose नही है हकीकत है खुशकिस्मत महिलाओं का जिन्हें ऐसे हालात में नही रहना पड़ता का प्रतिशत बहुत कम है
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rajiv rikh
overdose ho gayi. all possible tragedies have been put in to make it heart rending story.
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