कातिल कौन ?

वंदना गुप्ता

कातिल कौन ?
(210)
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सारांश

“क्योंकि औरत होना पहला गुनाह है” “उसका दूसरा गुनाह है बाप दादा भाइयों की मिलकियत बन ज़िन्दगी गुजारना और अपने बारे में कभी न सोचना” “उसका तीसरा गुनाह है गूंगी गाय सी हंक जाना जहाँ चाहे वो हाँक दें ...
Prem Kumar
समाज को आइना दिखाती कहानी,हमारे समाज मे शादी के बाद अकसर लड़कियों को उनके हाल पर छोड़ दीया जाता है। केवल शादी करके ही अपने को जिमेंवारी से मुक्त न मान यह देखना आवश्यक है। कि बच्ची के साथ ससुराल में गलत तो नही हो रहा है।पीहर पक्ष को लड़की के प्रति जागरूक होना जरूरी है,यदि कुछः भी गलत महशूस करें तो तुरन्त विरोध दर्ज करें ।इसमें यदि कानूनी सहायता की आवश्यकता होतो संकोच नही होना चाहिए।
Kuku Kuku
यें कहानी समाज का आईना हैं । बहुत बढ़िया
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Nikita Patil
bilkul shi h this is true
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rvi kapoor
badiya
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Jaiveer Singh Poonia
कहानीआज के दौर की सही सटीकबेठती है । बहुत बढ़िया
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Rajesh Kumar
sirf ek * Diya hai wo bhi isliye kyonki is kahani ko padhkar mujhe koi bhi maza Anya kahaniyon jaisa nahin mila, kyonki is kahani ne wakai mujhe rula diya, main nishabd Hoon!! ab samay aa gaya hai aur hamein apne Ghar se hi shurwat karni hogi is burai ko door karna hoga!!
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Tulsiram JaiSwal.
बहुत सुंदर रचना लेकिन जब तक औरतें ही अपनी बहू बेटी को भारत समझती रहेगी तब तक बेटियां इसी तरह भर्ती रहेंगी आदमी तो आज भी औरत का गुलाम है चाहे वो मां या और कोई जैसे शालिनी की सांस भाभीयां आदि धन्यवाद आपका आगे भी इसी श्रेणी की रचना पढ़ने मिलती रहेंगी इसी आशा के साथ
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Ruchika Khanna
U r right . U have shown the real image of the सोसाइटी.
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