कहां जाऊं मैं..??

दीप्ति मिश्रा

कहां जाऊं मैं..??
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सारांश

दिल्ली जैसे शहर में जमने के लिए शुरुआत में किसी न किसी की मदद की जरूरत ही होती है। रागिनी मेरी बचपन की दोस्त है। मेरी पहली नौकरी दिल्ली में लगी है, जब इसकी सूचना रागिनी को दी, तो वह खुशी से उछल पड़ी। ...
Sravan Yadav
बेहतरीन लेखन।। शुभकामनाएं. कभी कभी जिन्दगी में ऐसे पड़ाव आतें हैं जो हमें खामोशी के आगोश में लपेटकर चलें जातें हैं और हम निशब्द हो जातें हैं.
Deepu Mishra
लोग इतने निर्दयी कैसे हो जाते हैं ..
seema pal
wah very nice isly to ab to pyrr eak khel ban kar rah gaya hai bas
Vijay Mishra
पता नहीं लोग ऐसा क्यों करते हैं..👌👌
Ana Gupta
bhut acha likha apne aisa mere sath ho rha hai. pyar se bhrosa hi uth gya hai mera
deepa kumari
nhi sochta koi aap ko chhod ke Jane se phale
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