कशिश

Arunima Thakur

कशिश
(211)
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सारांश

पहले प्यार के जीवन के सफर में ठकराने और गुम हो जाने
Manju Sharma
बेहतरीन उमदा रचना, मुझे लगता है कि ऐसी कशमकश शायद सभी के जीवन में हो सकती हैं मेरे लिए यह एक सच्ची कहानी है ।
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पवनेश मिश्रा
आठवें जन्म की परिकल्पना के साथ क्रश को जोड़कर आपने सिर्फ एक कथानक नहीं लिखा अरुणिमा जी बल्कि आपने उन नितांत निजी विचारों को भी सहज सुंदरता के साथ लिखा जिन्हें अक्सर वक़्त की रेत दबाती नहीं बल्कि परत दर परत नीचे धकेलती जाती है लेकिन वह अपल्लवित कोमल भावनाएं कभी न कभी अंकुरित हो ही जाती हैं, विनम्र साधुवाद 🙏🌹🙏
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Seema Thakur
अच्छी है लेकिन आगे पीछे का कुछ और भी बताना चाहिए था,,,,,,,,
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Reena singh
मन और दिल की बातों को बहुत ही अच्छी तरह लिखा है
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Anshu Monga
bahut sunder
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आलोक मोहन
सहज अभिव्यक्ति
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sudha tiwari
speechless
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Kiran Tiwari
सरल रिश्तों की सरल सहज कहानी, मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्दों में अभिव्यक्त किया है । बधाई स्वीकारें ।
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Rekha Gupta
Dil ko chhu gya yar
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