कशमकश

Nandini singh

कशमकश
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सारांश

आज सुबह से ही सुधा अजीब सी उधेड़बुन में थी। जितना वो इस से बाहर आने की सोचती उतना ही खुद को और उलझनों के तानो बानो में घिरा पाती। मन  में चलते हुए मंथन से उबरने के लिए सोचा चलो एक कप चाय हो जाये| ये ...
धर्मेंद्र विश्वकर्मा
बढ़िया लेखन .. सुधा की कश्मकश का कोई हल तो निकला.....? वरना ये कश्मकश कई बार कई रिश्तों को बिखेर देती है......
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