कल, आज और कल

डॉ .अमिता नीरव

कल, आज और कल
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सारांश

बहुत कुछ खोकर भी जिंदगी सब कुछ दे देती है, ऐसा तो नहीं है। कुसुम ने अपनी उजड़ी दुनिया को तरतीब दी, बहुत कुछ छोड़ा, बहुत कुछ त्यागा, फिर भी नहीं जीत पाई, अपनों से... हार गई और हार उसने स्वीकार कर ली। ...
Amit Kumar
5 star bhout kam hai
Rajeev Singh
आदरणीय डॉ साहिबा जी मनु के किरदार को थोड़ा और समझदार हो ना चाहिए था। बाकी सारी कहानी एक बेहतरीन रचना है। मेरी तरफ से आप को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं राधे राधे
JAWAHAR LAL SINGH
कश्मकश से भरी जिंदगी को हू-ब-हू कागज पर उतार दिया आपने।
urmila
एक माँ की विवशता, त्याग और मानसिक स्थिति को उसके बच्चे भी नही समझ पाते हैं।
Geeta Ved
well done very nice story
ravinder agarwal
bahut khub amita ji, kya likha hai apne . bahut hi sambednsil si kahani hai.
kshnda anula
नई सोच है अभी यह हमारे समाज के लिए। शुरुआत हुई है लेकिन सफर बहुत लंबा है।
Aparna Sinha
Aurat akele sab ki parwaris Kar Sakti hai, magar samaj aur pariwar ki such badalni chhiye
shakun gautam
किसी को भी गलत नहीं ठहराया जा सकता,एक अजीब उलझन को लेकर लिखना 👌👌👍
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