कल, आज और कल

डॉ .अमिता नीरव

कल, आज और कल
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सारांश

बहुत कुछ खोकर भी जिंदगी सब कुछ दे देती है, ऐसा तो नहीं है। कुसुम ने अपनी उजड़ी दुनिया को तरतीब दी, बहुत कुछ छोड़ा, बहुत कुछ त्यागा, फिर भी नहीं जीत पाई, अपनों से... हार गई और हार उसने स्वीकार कर ली। ...
Yogita Garg
bahut hi badiya 👌
Sona Mourya
very nice respect all woman's
Anand Joshi
अगर औरत के मन की पीड़ा को खुद नहीं समझती तो उसने साइकलोजीसट जिसके पास जाना चाहिए था। यह इंडिया का सबसे बड़ा प्रॉब्लम है। 50 साल पुराना दकियानूसी फॉर्मूला है ।वही रगड़ रगड़ के लिखा जा रहा है
Meena Soni
Bahut achchi or shaf Sundar story jisme ek aorat ke dill ka dard or vyatha ko saral shabdo me ek nari ne hi samjha .very nice
Mridula Sharma
कटु सत्य, सयंमित भाषा मे बहुत कुछ कह गईं
Prince Jain
बहुत ज्यादा बढ़िया बहुत ही अच्छा शब्दो मे पिरोया हैं आपने एक स्त्री के मन की पीड़ा को और उसके बच्चे के मन की पीड़ा को
shivani
very good, ek nai soch ki or le jati h
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