कलियुग के राम

Manish Shukla

कलियुग के राम
(7)
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सारांश

प्रेम की कोई परिभाषा नहीं होती... कोई स्वरूप नहीं होता... जब हम एक दूसरे की चिंता करते हैं, अपने रिश्तों को निभाते हैं तभी प्यार की सच्ची अभिव्यक्ति होती है। त्याग और अपनापन ही प्रेम की निशानी है। ...
Hari Agarwal
Behatrin
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Santwana Mishra
कहानी का अन्त बहुत अच्छा लगा ।बहुत अच्छी कहानी ।
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surya prakash pandey
वाह
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Shilpi Bakshi
रिश्तों में प्यार को परिभाषित करती कहानी
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