कलरब्लाइंड साजन

मोहित शर्मा ज़हन

कलरब्लाइंड साजन
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सारांश

हॉस्पिटल में हुई जांच में रूही को पता चला कि आशीष को झूठ बोलना आता है। वो कई महीनों से छोटा मर्ज़ मान कर अपने फेफड़ों के कैंसर के लक्षण छुपा रहा था, जो अब बढ़ कर अन्य अंगो में फैल कर अंतिम लाइलाज चरण में आ गया था। अब आशीष के पास कुछ महीनों का वक़्त बचा था। दोनों अस्पताल से लौट आये। अक्सर बुरी खबर का झटका तुरंत महसूस नहीं होता। पहले तो मन ही झुठला देता है कि कम से कम हमारे साथ तो ऐसा नहीं हो सकता। फिर फालतू की छोटी यादें जो किसी तीसरे को सुनाओ तो वो कहेगा कि "इसमें क्या ख़ास है? यह तो आम बात है।" पर वो भी कैसे समझेगा आम बात अगर किसी ख़ास के साथ हो तो उस ख़ास की वजह से ऐसी बातें आम नहीं रहती। रात के वक़्त आशीष से उलटी तरफ करवट लिए, तकिये पर मुँह सटाये सिसक रही रूही को उसके जीवन का सबसे बड़े ग़म का झटका लगा था।
Sonia Shukla
वाह वाह वाह!!!
Mamta Upadhyay
दिल को छू गई आपकी कहानी
रीता जाँगिड़
बेहतरीन रचना,👏🏻👏🏻👏🏻 भाव-विभोर हो गए हम तो 💐💐💐
Binod Binani
अति उत्तम मन को छू गई ऐसा गहरा प्रेम का रंग
Babita Gautam
very nice ,heart touching story
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