कर्मभूमि

मुंशी प्रेमचंद

कर्मभूमि
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सारांश

हिन्दी भाषा के महानतम साहित्यकारों में से एक, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा राष्ट्रवादी आन्दोलन की पृष्ठभूमि में लिखा यह उपन्यास बदलते दौर के सामाजिक इतिहास का जीवन्त चित्रण है।  हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं इन दोनो ही समुदायों के साझा लक्ष्य; किसान, गरीब और दलित वर्ग का अपने अधिकारों के लिये अहिंसात्मक संघर्ष उपन्यास की मुख्य विषय-वस्तु है. आज के समय में भी ये उपन्यास इतना ही सामयिक एवं प्रसंगिक है जितना उस समय था, और यही बात इस उपन्यास को कालजयी बनाती है.
Uday Shanker Verma
बहुत अच्छी पुस्तक है।सभी को एक बार आवश्यक पढ़ना चाहिए
Rahul Jha
don't have words to describe my felling. an
Divya pratap
बहुत बढ़िया
MITHILESH TIWARI
शब्द रहित ।
prashant gupta
samajik tane bane ko vastavikta se ukerti hui adhbhut kahani....
Nidhi Gupta
kash ki ye kahani poori ho gayi hoti.
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