कर्मभूमि

मुंशी प्रेमचंद

कर्मभूमि
(404)
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सारांश

हिन्दी भाषा के महानतम साहित्यकारों में से एक, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा राष्ट्रवादी आन्दोलन की पृष्ठभूमि में लिखा यह उपन्यास बदलते दौर के सामाजिक इतिहास का जीवन्त चित्रण है।  हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं इन दोनो ही समुदायों के साझा लक्ष्य; किसान, गरीब और दलित वर्ग का अपने अधिकारों के लिये अहिंसात्मक संघर्ष उपन्यास की मुख्य विषय-वस्तु है. आज के समय में भी ये उपन्यास इतना ही सामयिक एवं प्रसंगिक है जितना उस समय था, और यही बात इस उपन्यास को कालजयी बनाती है.
arbind Bihari
बहुत अच्छा
Prince
बहुत अच्छी और एक सामाजिक कहानी है ।।
rittu
bhut hi badhiya
kaustubh tiwari
एक बार मे पूरी पढ़ गया 7 बजे 2:57 तक लगातार
ANURAG SRIVASTAV
very nice experience with this book
Chanan Singh Dhaliwal
अद्वितीय उपन्यास
Ajnish Verma
wah wah wah!!!! I hv completed it only in three days.mere pass taarif ke liye words nahi hai lekin munshi prem Chand ji ke pass shabdon ka bhandaar tha.is liye main unke novels padhti hun.i love u Mr .writer.thanx for this beautiful karmbhumi.
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