कब पढ़ पाओगे

सुशील शर्मा

कब पढ़ पाओगे
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सारांश

मन के कोने सजे प्यार कोकब तक पढ़ पाओगे तुम।प्रेम संवेदनाओ को समझोगेया मन में घुटते रह जाओगे तुम।दर्द की नदियां बहती अंदरकब तलक बाँध बनाओगे तुम।याद के खंडहर बिखरे मन मेंउन से कब बाहर आओगे तुम।इंतजार में
Jainand Gurjar
accha likha hai💐💐💐💐 जी आप मेरी नई कहानी"मानसिक बलात्कार" और "उसका यूँ तोतलाना" पढ़ सकते हैं।
Bhuvneshwar Chaurasiya
बेहतरीन अभिव्यक्ति
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