कनक-रजत

पिंकी राजपूत

कनक-रजत
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पाठक संख्या − 230
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सारांश

कनक के चेहरे पर जितनी उदासी झलक रही थी ठीक वैसी ही उदासी रजत ने भी ओढ़ रखी थी....
डॉ. मनीष गुप्ता
अच्छी कहानी। व्याकरण थोड़ी सही करने की जरूरत है।
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रविन्द्र
सुन्दर रचना।।
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Satpal. Singh Jattan
beautiful story
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Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'
सही है, जो आसानी से मिले, इंसान उसकी कद्र नहीं करना जनता।
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Wr. sandeep patel (Surya)
Nice... all the best lagi rahe....✍✍✍🌺🤝
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