ओ रे गुड्डी !!!

पूनम डोगरा

ओ रे गुड्डी !!!
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सारांश

जब भी इंडिया आती हूँ सोचती हूँ इस बार तो हाथ भर रंग बिरंगी कांच की चूरियां पहनूंगी, पर जब मौका आता है तो उस वक़्त याद नहीं रहता. पिछली बार कब कांच की चूड़ियाँ पहनी थीं, याद नहीं पड़ता. शायद अपनी शादी ...
Meena Sundriyal
apna bachpan Yaad aa Gaya
Omesh Jain
बचपन की यादों की कहानी अति सुंदर
Suman Varma
vo door tha bachpan ka ye door javani h nice story
Vivek Vaidya
बहुत सुंदर ....touching
मधुलिका साहू
मन छू गयी । अक्सर बच्चों में ऐसी कुट्टी हो जाती है पर कसक मन में बनी रहती है -काश कुट्टी ना हुई होती ।
Virendra
All story very nice
Renu Sharma
Bilkul nhi pakki dosti me katti nhi hoti
Shailja Sharma
Bachpan buahut hee sajeev ho Gaya
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