ऑन द हेज ऑफ मिडनाइट लिली- 2

Nitin Mishra

ऑन द हेज ऑफ मिडनाइट लिली- 2
(338)
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सारांश

रात और ज्यादा सर्द हो चली थी| बारिश और तेज़ हवा का शोर जैसे दिमाग पर नगाड़ों सी चोट कर रहा था| रात के अन्धकार में भी क्षितिज तक बिखरे हुए लाल वर्षामेघों से हर थोड़ी देर पर बिजली कौंध कर जैसे चेतावनी दे र
Prem Shankar Mishra
Abhutpurv romanch. Coresmetic.
Chandan Sinha
शानदार कहानी
Fahmina Abidi
just wow I m speechless
उमा charan
isse jyada achhi story to koi ho hi nhi skti he superb
Mukesh Soni
बहुत शानदार कहानी
shobha
awesome . mind bloing story आप अद्भुत कल्पना शक्ति के मालिक हैं आज पहली बार आपकी रचना ओ को पढा है आपकी लेखन कला मे जादू है I am impressed
Jyoti Agarwal
Very nice story. Last tak suspense bana raha ab kya hone wala
Aarti Jain
fantastic story words hi nhi mil rhe bolne k liye
Chitrapriya Ganguly
ग़ज़ब। जब तक कहानी पूरी हुई मेरी साँस अटकी हुई थी। इसपे मूवी बननी चाहिये
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