एक यायावर की रोमांचक दास्तान ‘मेरी आत्मकथा-किशोर साहू’

Shyamkumar Hardaha

एक यायावर की रोमांचक दास्तान     ‘मेरी आत्मकथा-किशोर साहू’
(28)
पाठक संख्या − 46
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सारांश

इस तरह हमारे विदर्भ का यह लाडला पुत्र ‘हीरो’ बनने बंबई चला जाता है. वहां जाकर उसे क्या-क्या करना पड़ता है, अनेक सुखद-दुखद संयोगों का किस तरह सामना करना पड़ता है. आखिरकार सफलता उनके कदम चूमती है. किस तरह से विदर्भ की यह माटी आगे चलकर किस तरह चमकती मूरत बनती है, यह इस किताब में है. आगे के प्रसंग और भी प्रेरणीय, रुचिकर, रोमांचक और अत्यंत मर्मस्पर्शी हैं- यह सब जानने के लिए आपको लगभग 418 पृष्ठीय पूरी किताब ही पढ़नी होगी- ‘मेरी आत्मकथा किशोर साहू’
Tikaram Sahu 'aazad'
किशोर साहू के फिल्मी सफर पर दिलचस्प आलेख जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से रूबरू कराता है।
Padmini saini
आपके जैसे गम्भीर ओर उत्तम लेखको की अति आवश्यकता है तभी हिन्दी लेखन ओर ओर लेखको का सम्मान बढ़ेगा ,,, बेहद रोचकता के साथ लिखा गया है पढ कर मन ही नही भरता,,, प्रशंसनीय।
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Kailsh Dehariya
बहुत बढिय़ा सकरात्मक. समीक्षा।
शशि कुशवाहा
bahut badiya jankari
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मो अली अहमद अंसारी
आपकी सकारात्मक सोच आपके लेखन को सुंदर बनाने वाले शब्दों में कहा गया।सकारात्मक सोच हमारे देश, समाज के लिए बहुत लाभदायक है। सकारात्मक सोच से हम हर लड़ाई जीत सकते हैं।बहुत खूब 👏🏼👏🏼👏🏼🙏🙏🙏 आगे भी हमें ऐसी रचना देते रहें।आपके आभारी रहेंगे
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Kumari Anshu
गाईड फिल्म देखते हुए मेरी माँ ने किशोर साहू के विषय में थोड़ा बताया था और जानने की उत्सुकता थी ,बहुत अच्छा लगा उनके विषय में जान कर
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