एक मुद्दत से तुझे याद किए जाता हूँ

प्रषान्त मिश्र

एक मुद्दत से तुझे याद किए जाता हूँ
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सारांश

एक मुद्दत से तुझे याद किए जाता हूँ। मैं तो तनहा ही ये लम्हात जिए जाता हूँ।। क्या हुआ तुम न हुए मेरे मुकद्दर में कभी। इश्क तुमसे ही दिन-ओ-रात किए जाता हूँ।। हर दुआ में तुझे मांगू ये जरूरी तो नहीं। पर ...
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