एक बटा दो

Damini

एक बटा दो
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सारांश

एक बटा दो " फिर क्या हुआ दादी" रिया बोल उठी ठंडी सांस भरकर मैं मौन हो गई। क्या बताऊँ कि क्या हुआ था। क्या समझ पाएंगी ये जो उस समय हमने झेला था। कितनी आसानी से हुक्मरानों ने कह दिया अब तुम एक से दो ...
deepak sikarwar
दामिनी जी आपने जो बंटवारे का चित्रण किया है वह बहुत ही मार्मिक है।ठीक इसी ही कुछ वाकये मेने अपने दादाजी से भी सुने है। इन बातों को सोच कर ही दिल अबसादो से घिर जाता है।
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Achal Yadav
आपकी इस रचना को पढ़ कर उस दर्द को महसूस किया जो लोगो ने उस समय झेला होगा ।।।बहुत ही मार्मिक लिखा आपने।।सादर प्रणाम आपकी लेखनी को
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Neetu Rana Neetu Rana
बहुत ही अच्छी कहानी.......👌👌👌👌
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Kiran Chauhan
बहुत ही अच्छी लगी आपकी की रचना ।
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Poonam Aggarwal
बंटवारे के समय का प्रत्येक साहित्य मर्मस्पर्शी होता है । बहुत उम्दा कहानी है । अमृता प्रीतम की रचना पिंजर की याद आ गई ।
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Padmini saini
जब बंटवारा हुआ मेरा जन्म नही हुआ था जब स्कुल गयी, पढ़ने लगी ओर कुछ कुछ नही बहोत कुछ समझने लगी तब मैने बंटवारे के बारे मे पढा ओर सुना सच कहुँ तो जो पढा उससे ज्यादा खौफनाक सुना था,, मै जितना भी सुनती समझती पता नही क्युं मेरा दिल बहोत जोर से तड़प उठता था ओर बहोत दिनो से अपनी उस तड़प ओर दर्द को शब्दों का रूप देना चाह रही थी पर समय नही होने के कारन कर नही पायी पर अब सोचती हुँ इतना दर्द ओर इतनी भावनाएं ओर दुख शायद मे शब्दो मे नही लिख पाती जो "दामिनी" तुमने किया है ये मेरे दिल के करीब रहेगी हमेशा ।।
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Shanti Dihiye
bahut hi sachhi bat, kya kahu pata nhi, bas alfaj nahi hai likhne keliye 🥺👌👌👌👌
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Shourabh Prabhat
आपकी रचना का एक एक शब्द दिल पर चोट करता सा प्रतीत होता है... बहुत ही उम्दा लेखन...
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पूजा
ऐसा सजीव चित्रण विभाजन का... मार्मिक ,भयावह ,संवेदना पूर्ण यथार्थ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏.सच में बटवारा केवल देश का नहीं दिलों का था...अनुमति चाहूँगी अपने पिटारे में शामिल करने की🙏🙏🙏🙏
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Anuj Shrivastav
Bahut hi dukh aur kast bhari kahani hai jivan ki ek bata do lekin yah hamesha yaad rakhna ki Muslim logo par kabhi vishwash nahi karna chahiye vo vishwash layak nahi hote kyuki unke ander insaniyat nahi hoti Jo janvar khate hai unme insaniyat nahi hoti aise log hamesha doosare ka bura chahete hai dikhne me bahut sarif dikhege murdo ki pooja karte hai jyada kahena nahi chahuga story kya vaise bhi vaise bhi vaise hi hoge gande soch ke log
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