एक प्रेम की परिणति

देवेन्द्र प्रसाद

एक प्रेम की परिणति
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सारांश

आज ही महाबलेश्‍वर पहुंचा हूं। ताज रिसॉर्ट में अपने कमरे में पहुंच, पलंग पर पसरकर सुकून की सांसें ले रहा हूं। अमूमन, जो सुकून कुछ व्यक्तियों को किसी व्यावसायिक दौरे से थक-हारकर घर लौटने पर मिलता है, ...
Mandeep Kaur
awesome mja agya, truth is bitter but it's too much bitter,wonderfull writing
Shelly Gupta
हा हा हा, बहुत बढ़िया
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Aashvi
is khani ka ant mujhe bahut pasand aaya...aisa sach me ho skta hai
राजेश सिन्हा
खूबसूरत कहानी
Aashish Kumar
बहुत सुंदर रचना देवेंद्र जी मेरी भी एक प्रेरणा है जो बिल्कुल आपकी प्रेरणा से मिलती जुलती है कारण की वो भले ही सारा दिन बच्चे परिवार में समय देती है ,पर हम खुश है और बहुत प्यार करते है अपनी प्रेरणा से क्योंकि मेरी प्रेरणा मेरे पूरे परिवार (माँ,बाबू जी,भाई, बहन,बच्चे) सभी को एक धागे में पिरो कर रखी है। एक बार फिर से धन्यवाद इसी तरह लिखते रहिये
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Namrata Bajaj
देवेंद्र जी, आपके आग्रह पर यह कहानी पढी। यह कहानी भी बहुत अच्छी लगी। उम्मीद है कि आगे भी आप हल्के-फुल्के अंदाज़ में और इस तरह के उम्दा लेखन से पाठकों को अभिभूत करते रहेंगे।
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