एक पत्र कन्या भ्रूण हत्या पर

Seema Saini

एक पत्र कन्या भ्रूण हत्या पर
(4)
पाठक संख्या − 35
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सारांश

कहते है आज समाज बदल रहा है यदि सच मे समाज बदलाव की ओर है तो क्यों बेटियाँ आज भी स्वतंत्र नहीं घूम सकती । लडकियों को परिवार और समाज का डर दिखाकर डराया जाता यदि वो इनके खिलाफ आवाज उठाती है तो उसे असंस्कारी लडकी का तमगा दे दिया जाता है । शिक्षा की आवश्यकता जितनी लडको को है उतनी लडकियों को भी है ,जिससे लडकियाँ आत्मनिर्भर बनकर अपना जीवन खुशी से जी सकें और आने वाली हर परिस्थितियों से लडने मे सक्षम हो सके
Ankit Bhushan
आपकी लेखनी सराहनीय है, आपने समाज के कुरीतियों विरुद्ध जो लिखा है,वह आपके लेखनी में चार चांद लगा देते हैं..
Arun
bhavnao ki sundar aur marmik prastuti..samaz Ko aaina dikhaya hai seema ji aapne..bhut vadhiya.
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मंजीत कुमार
समाज को दर्पण दिखाने वाला बेहतरीन पत्र लेखन👌👌👌👌👍
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