एक नया इम्तेहान: 1

निदा ज़हरा

एक नया इम्तेहान: 1
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सारांश

दोनों का दम घुटता था पर मजाल थी एक 'उफ़' कर दें. एक घर, एक कमरा, एक बिस्तर. सब कुछ एक होते हुए, कुछ भी तो एक न था. शादी को इतना वक़्त गुज़र जाने के बाद जिधर सब साथ में उठने-बैठने वाले दोस्त एहबाब ...
Anita
thoda light words use kijiye story acchi h but words kbhi kbhi samajh me ni aate
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सुरेश चंद्र
कहानी थोड़ा और एक्सटेन्शन मांग रही है,जरा गौर फरमाएं।लब्जों में खासी कशिश है पढ़कर अच्छा लगा।
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Ashish Kala
kuch samajh me nahi aaya sach me
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