एक थी पार्वती

आरजू वैष्णव

एक थी पार्वती
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सारांश

ये कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है |माँ और बेटी का रिश्ता बड़ा अटूट होता है किन्तु इस घटना ने किशोरावस्था में ही मेरे मन को इस कदर झकझोर दिया कि वो नन्ही सी बच्ची आज भी मेरे स्मृतिपटल पर विद्यमान रहती है |न जाने क्या कसूर था उसका ,किस बात की सज़ा मिली उसे ,क्या दुनियाँ में आना उसका गुनाह था ...ये कहानी आपको भी भावुक कर देगी ....एक बार अवश्य पढ़ें |
Deepak Dixit
सुंदर
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Himanshu Modi
Bahot hi bhavnatmak kahani hai...
Shanta Thripathi
bahut hi hriday sparshi kahani, aanke bhar aayi.
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Ankit Maharshi
क्या फ़र्क पड़ता है आपको याद है या नहीं,, ये 5 स्टार अच्छी कहानी के लिए। और उस कायरता के लिए क्या कहूं की आपके पड़ोस में एक मासूम पर अत्याचार होता रहा और आप इस लायक भी नहीं कि एक फोन पुलिस को कर दे। अगर थोड़ी हिम्मत दिखाई होती तो वो मासूम जिंदा होती।
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अचलेश सिंह
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
रीतू गुलाटी
बढ़िया कहानी पर समाज के लिये सवाल छोड़ गयी। मेरी कहानी भी पढ़ें।
Ajay Singh
aansu aa gaye ....
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सोमेश कुमार
achche lekhko ko pdhen jitna pdhoge utna adhik vicharon evm prstuti ka vichar aaiega.apne likhe ko bhi kyi baar pdho.fir prstut kro.aap achcha vishy chunte ho pr prstuti me nikhar ki jrurt hai
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