एक जैसे ही थे दोनों

निशान्त

एक जैसे ही थे दोनों
(174)
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सारांश

गुड्डू जा चुका था और कुछ एक पल की खामोशी के बाद मेरे दिल में न जाने क्या आया की मैंने रसिका की बैकलेस और डीप नेक वाली ड्रेस देखते हुए उससे पूछ लिया, "इतनी सर्दियों में लड़कियां कैसे इतने कम कपड़े पहन कर पार्टी अटेंड कर लेती हैं?" रसिका ने एक पल को हैरान हो कर मुझे देखा और फिर उसी कातिल अदा से मुस्कुरा कर मुझसे बोली, "और लड़कियों का तो पता नहीं, मुझे गर्म कपड़ों की ज़रुरत कम पड़ती है क्यूंकि मैं हॉट हूँ. "मेरे लिए वो एक मायने में अनजान लड़की थी और ऐसा कुछ पहली ही मुलाक़ात में मैं सुनने को मेंटली तैयार नहीं था. लेकिन मुझे लगा देवर समझ कर मज़ाक कर रही होगी इसलिए मैंने भी सोचा की वैसा ही कुछ जवाब दे दूं. मैंने इतराते हुए कहा, "तो एकदम से आपको गर्म कपड़ों की ज़रूरत क्यूँ पड़ गयी?" मुझे लगा रसिका झेल जाएगी, लेकिन उसने मुझे फिर चित कर दिया. अपने क्लीवेज की ओर एक नज़र डालते हुए बोली, "शायद मेरी हॉटनेस आज कुछ कम हो गयी है. वरना भला आप नोटिस न करते ऐसा नहीं हो सकता था. इसी लिए सर्दी लगी आज."
Pawan Tandon
bhoot khub Guddu or Rasika ke poore 36 gun mile lgte h
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Vishakha
excellent
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Ashish Pathak
nice story
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Vivek Srivastava
Nice
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Neha Thakur
nyc
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Manjari Shukla
nice
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Vatsal Kothari
next chapter kab likho ge
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Prakash
,😊😊😊 nice 💓 touching story 👏
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sham sher
पाठक को आपने कहानी के आख़िरी समय तक बांधे रखा... बढ़िया
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Himanshu Pal
Kaha milegi aisi bhabhi ji
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