एक जैसे ही थे दोनों

कहानी Café

एक जैसे ही थे दोनों
(316)
पाठक संख्या − 22087
पढ़िए

सारांश

गुड्डू जा चुका था और कुछ एक पल की खामोशी के बाद मेरे दिल में न जाने क्या आया की मैंने रसिका की बैकलेस और डीप नेक वाली ड्रेस देखते हुए उससे पूछ लिया, "इतनी सर्दियों में लड़कियां कैसे इतने कम कपड़े पहन कर पार्टी अटेंड कर लेती हैं?" रसिका ने एक पल को हैरान हो कर मुझे देखा और फिर उसी कातिल अदा से मुस्कुरा कर मुझसे बोली, "और लड़कियों का तो पता नहीं, मुझे गर्म कपड़ों की ज़रुरत कम पड़ती है क्यूंकि मैं हॉट हूँ. "मेरे लिए वो एक मायने में अनजान लड़की थी और ऐसा कुछ पहली ही मुलाक़ात में मैं सुनने को मेंटली तैयार नहीं था. लेकिन मुझे लगा देवर समझ कर मज़ाक कर रही होगी इसलिए मैंने भी सोचा की वैसा ही कुछ जवाब दे दूं. मैंने इतराते हुए कहा, "तो एकदम से आपको गर्म कपड़ों की ज़रूरत क्यूँ पड़ गयी?" मुझे लगा रसिका झेल जाएगी, लेकिन उसने मुझे फिर चित कर दिया. अपने क्लीवेज की ओर एक नज़र डालते हुए बोली, "शायद मेरी हॉटनेस आज कुछ कम हो गयी है. वरना भला आप नोटिस न करते ऐसा नहीं हो सकता था. इसी लिए सर्दी लगी आज."
Ikshita Sînghaniya
really both are same
रिप्लाय
Gazal vipin garg
interesting... amazing story💝💝
रिप्लाय
Meenaxi Sukhwal
बहुत अच्छी कहानी । आज के समाज का सच बहुत बेहतरीन तरीक़े से प्रस्तुत किया है आपने ।
रिप्लाय
Preeta Singh
nice
रिप्लाय
Karamvir choudhary
Nice
रिप्लाय
Shivaa Shastri
waaaaah kya baat h.....
रिप्लाय
Gattu Sharma
yahi ho raha h aaj kal
रिप्लाय
प्रणव तिवारी
अंत तक बांधे रखने वाली कहानी है,
रिप्लाय
sujata Choudhury
🙄😐
रिप्लाय
sugandh yadav
hey bhagwan, har riste mai jhol....
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.