एक और कारगिल

संतोष श्रीवास्तव

एक और कारगिल
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सारांश

उतरते अक्टूबर की गुलाबी शामें| मुंबई का मौसम सहता-सहता सा खुशगवार| दरवाज़ा खुला था| जूते बाहर ही उतारने पड़े| वे सोफे पर बैठी थीं और दरवाजे के पास ही बने ऊँचे से मंदिर में दीया जल रहा था| अगरबत्ती के ...
Priya dubey
kahani bht achi hai
atulpatel
ज़ियादा तो kuchh समझ nahi aaya but achha hai
Rajesh Kumar
बहुत बढ़िया मार्मिक व शानदार
Vandana
जिन्दगी कि अजीब कश्मकश
Davinder Kumar
Shahid ki vidhwa ko aapne swarthi dikhaya hai. Disagree with you
Kamal Kishor
Actually it is normal story. There is nothing to be shock. Everybody is maintaing it's privacy. I am not agree with end. Why it needs to break????? Her parents are very practical and know everything.
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