एक अनकहा ख्वाब

हिमाँशु मोहन

एक अनकहा ख्वाब
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पाठक संख्या − 6375
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सारांश

ये कहानी पुराने दिनों की याद को ताजा करती चारू की कहानी है जो अपने परिवार और समाज के कारण एक ऐसा फैसला कर लेती है जो उसने कभी सपने में भी सोचा नहीं होता है... पुराने दिनों को याद कर चारू उन्ही पुराने दिनों में खो जाती है... और जब एकाएक उसे होश आता है तो उसे ठीक करना चाहती है.. लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है l क्या कहानी के अंत तक सब ठीक हो पाता है... जानने के लिए पढ़िए चारू का एक अनकहा ख्वाब...
gita
kumari
gita kumari
kaash aisa real life m v hota jise jo cahte wo mill jae .. but story to story hoti h.. bahoot acchi story lekhi h aapne..
Aanchal Mehrotra
i really loved the story...u hv pen it down very beautifully...😊
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Manu Prabhakar
शानदार प्रस्तुति सर जी। सच ये गुड लक वाली कहानी ही है।
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Nisha kour Shiledar
halki fulki mast story 👌👌
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Asha Jha
bhut sunder
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who's That
nice story ache se sabkuch likha gaya ..
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pramila gautam
बहुत ही अच्छी कहानी है
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Harshit Katiyar
bahut sundar
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Ashish Kumar
Very very very good
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