उसकी रातों में सुबह नहीं थी

जयंती रंगनाथन

उसकी रातों में सुबह नहीं थी
(540)
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सारांश

उसने अपना नाम बताया—सौम्या। बड़ी सी गाड़ी से उतरी जरूर, पर उसके चाल-ढाल में बड़ा होने वाली बात नजर नहीं आई। उसका कद मुझ जितना ही था। मुझसे ज्यादादुबली थी। बाल घुंघराले। मां कहती थी कि मैं हमेशा अपने ...
Ashish Arya
no words to describe... best story
Vijay Hiralal
aap itna accha kaise likh lete hai. shandar
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Brijbihari Singh
इंसान कही न कही बंधा होता है जिससे मुक्ति के लिए हमेशा तड़पता रहता है .......
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SiYa
निशब्द
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Pooja Sariyal
bahut sundar.
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Krishna Khandelwal singla
Mashaallah बहोत खूबसूरत कहानी है।
Rajkumari Mansukhani
vv lovely and heart touching unique story
Vijay Kumar
बहुत ही मार्मिक और दु:खद कहानी आज भी कई घरो में इस तरह की कि कहानी दबी हुई है.. जो शायद अंधेरे में ही गुमनाम हो जाती है.. जो कि काफी चिंताजनक और बेहद दु:खद है....
Jigna Upadhyay
bahot hi sulji hui or nice story 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
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