उलझे बालो वाली लड़की 

रीत शर्मा

उलझे बालो वाली लड़की 
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सारांश

शाम के ५ बज रहे थे उसी वक़्त मेरा मोबाइल बज उठा सामने विक्रम था हमेशा की तरह वो प्यार से बोला जानेमन क्या कर रही हो मैंने कहा कुछ नहीं बस अब ऑफिस से निकल कर PG जाउंगी तुम क्या आ रहे हो और सामने से जो सुना उस पर विश्वास नहीं हुआ विक्रम बोला जान पैकिंग कर लो हम घूमने जा रहे है आज फ्राइडे है मंडे भी ऑफ है और ट्यूसडे की मैं छुट्टी ले लूंगा तुम बस पैकिंग करो और रस्ते के लिए कुछ खाना  पैक करवा लेना मैं जल्दी पहुचता हु।  विक्रम भी ना सरप्राइज कर देता है कभी कभी , पिछले एक महीने से इसी बात पर  हमारी बहस चल रही मैं उसे कह रही थी लॉन्ग वीकेंड आ रहा है प्लान बनाओ पर उसने अपने घर जाने की रट लगा रखी थी हम दोनों ही गुडगाँव मैं जॉब करते थे अलग अलग PG मैं रहते थे हफ्ते मैं ३-४ बार मिल लेते थे पर वीकेंड पर विक्रम का घर जाना जरुरी ही था उसके पेरेंट्स उसका रास्ता देखते थे।
Kunj Dutta
bahut acchi kahani hi
Virendra Khari
बहुत सुन्दर रचना है
anjaan Dubey
बहुत सुंदर रचना ॥
komal
nice story...👌👌👌👌👌👌
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