उलझन

डॉ. श्रद्धा कृष्ण

उलझन
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सारांश

अपने शहर की खुशबु ही अलग होती है..ट्रेन पटरियों पे दौड़ी जा रही थी और उससे भी तेज भाग रहा था मेरा मन ..अपने शहर की ओर..बस सोचती जा रही थी की कहाँ कहाँ जाना है..क्या करना है..क्या खाना है..जैसे सब कुछ ...
Rakhi Singhel
is uljhan ka jawab kisi ke paas nahi hai, ye har ladki ki kahani hai
Shobha Pandey
कहानी की शुरुआत अच्छी है उलझनों को सुलझाना ही जीवन है
दीपा
bht sahi kaha aapne....
ajay kumar tiwari
ग्रेट शैली जी
Ravindra Narayan Pahalwan
उलझन का हल तो खोजना ही होगा, यही तो जीवन है / चित्रण प्रभावशाली है / परिणाम...
सुनील गोयल
कुछ ख़ास नहीं
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