उम्मीद

वंदना गुप्ता

उम्मीद
(35)
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सारांश

क्या सबके साथ ही ऐसा होता है ? जब धडकनों के स्पंदन चुगली करने लगते हों , आँखें हर पल बेचैन सी कुछ खोजती हों, लबों पर आकर हर बात दम तोड़ देती हो और नींद तो जैसे जन्मों की दुश्मनी निकालती ...
Jayshankar Rajbhar
Very nice story,
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Ravi Sinha
👌👌👌👌👌👌💐
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sachin
प्यार में कुछ होता है ।पर प्यार ही सबकुछ नहीं होता ।। बहुत ही मन मोहक कहानी है।इसका कोई मोल नहीं अनमोल है।।
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रीतू गुलाटी
वाह।प्यार का कोई मोल नही।
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raghav
शानदार, अदभुत
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बृजभूषण खरे
बेहतरीन लेखन. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
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Rashmi Awasthi
सही कदम पूजा के द्वारा
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Anish Jain
क्या है यह प्यार ....!!??? कभी बहुत दूर  कभी बहुत पास.... पर वंदना जी प्यार में दो तहर की जिंदगियां बिताना ....  How did u think about it....  
Prashant Tomar
अति सुन्दर ।
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