उत्पीड़न

मिश्रा प्रिया

उत्पीड़न
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सारांश

बेटी बचाओ का नारा तो सबने दिया पर शायद कभी कभी बेटा बचाना भी जरूरी है और महज पुरुष नाम से उसे दोषी बनाना उचित नहीं है किस तरह मानसिक उत्पीड़न का शिकार एक पुरुष हो सकता है ये उसकी मार्मिक कहानी है
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