उठ द्रोपदी शस्त्र उठा अब गोविंद न आएंगे

Dharm Pal Singh Rawat

उठ द्रोपदी शस्त्र उठा अब गोविंद न आएंगे
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सारांश

अब समाज से कोई उम्मीद नही रखनी होगी स्वयं के लिए लड़ना होगा। देखना एक बार पहल हो जाए महिलाएं दुनिया बदल कर रख देगी। हाथ में श्रधांजलि के लिए मोमबतियां नही दुष्टों को जलाने मशाल होनी चाहिंए।
Sandhya Bakshi
बेहद दुखद ! अंत में झकझोरने वाला आवाह्न !👌👌 कमाल का लेखन ! ज्वलंत मुद्दे को उजागर करती ,प्रभावशाली रचना । 🙏
आनन्द प्रकाश
ओह! बेहद मार्मिक। पर रावण की तुलना ऐसे वहशी और घृणित लोगों से करना मुझे गलत लगता है क्योंकि ये रावण से बहुत आगे हैं।
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Archana Varshney
अच्छी
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Arun Tiwari
बहुत सुन्दर
Sudhir Kumar Sharma
धन्यवाद. मेरी रचना, " हे राम, कहाँ से मैं लाऊँ " को कृतार्थ करें
Prakash Sharma
समाज को आईना दिखाती एक मर्मांतक रचना
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sushma gupta
बिल्कुल सही कहा 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏😔
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