उजाले का अंधेरा

विवेक मिश्र

उजाले का अंधेरा
(26)
पाठक संख्या − 5453
पढ़िए
Vikas Bansal
बेहतरीन
Cheenu Sharma
भाई सबका हाल ऐसा ही है
ऋतेश कुमार
हा हा हा! जले पर नमक!!
शशांक भारतीय
जबरदस्त कहानी विवेक जी। सिगरेट,रात जागना,संत्रास....बिल्कुल यही इसी कथानक और इसी ढर्रे पर मैने कहानी लिखी है वधू चाहिए, कृपया पढ़ें और अपनी अमूल्य रॉय अवश्य दें।
निशान्त
अच्छी कहानी। फुरसत हो तो मेरी नई कहानी, 'आज और कल के बीच', पढियेगा और अपनी टिप्पणी दीजियेगा।
ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
एक पुरुष, एक गृहस्थ, एक पति और बच्चों के बाप के अंतर के बिखरते, सिमटते , संवरते विवेक को उकेरती बहुत अच्छी कहानी।
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