ईदगाह

मुंशी प्रेमचंद

ईदगाह
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सारांश

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कित
मुन्नू लाल
कुछ कहने के लिए हम बहुत छोटे हैं ।मुंशी प्रेमचंद को नमन ।
Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌 bachpan ki yaade...
Abdullah Farhan
Kya khoob khani hai eidgaah best of all
Deepak Maru
ऐसे महान लेखक को शत शत नमन 🙏🙏🙏
Arti Saini
sach me school yaad aa gaya
गीतांजलि
छोटा बालक देता है लोभ को त्याग माँ की सेवा की सीख
Bhanu
शानदार कहानी ...बहुत मजा आया...
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