इश्क़ वो आतिश है ग़ालिब

सुशांत सुप्रिय

इश्क़ वो आतिश है ग़ालिब
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सारांश

सुमी करवट बदलते-से समय में वह एक उनींदी-सी शाम थी । एक मरते हुए दिन की उदास , सर्द शाम । काजल के धब्बे-सी फैलती हुई । छूट गई धड़कन-सी अनाम । ऐसा क्या था उस शाम में ? धीरे-धीरे सरकती हुई एक निस्तेज ...
Usha Kushwaha
नि:शब्द कर दिया आपने! इस रचना की समीक्षा के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास ।बस इतना ही कहूँगी कि इसका एक- एक शब्द अहसास की तरह मन में रच बस गया है।
MUZAFFAR SIDDIQUI
कहानी का एक एक शब्द ने दिल दिमाग़ में एक ऐसे नशे का अहसास कराया है जिसका असर कहानी खत्म होने के बाद भी बहुत देर तक रहेगा । एक ऐसा प्यार जिसकी खुशबू हवा के तेज झोंके में भी अपना असर बरक़रार रखती है । बहर हाल आपको लिखने का हक़ है । बहुत बहुत मुबारकबाद ।
Manu Prabhakar
शानदार कहानी । प्रेम हर विविधता से दूर है।
Mahii Khandelwal
Woow..... ek dam dil ko touch kr gyi
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