इति कृतम

अशोक गुप्ता

इति कृतम
(61)
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सारांश

ठंढ तो खैर थी ही, धुंध उस से कहीं ज्यादा थी, जिसकी वजह से हद से हद पचास मीटर की दूरी तक देखा जा सकता था. सुबह के छः बज कर सोलह मिनट हो रहे थे. पद्मशंकर की कार मेन रोड पर बस बीस किलोमीटर प्रति घंटे की ...
Rajni Gupta
bahut acha likhte hai aap
कुसुमाकर दुबे
एच आई वी के प्रति सकारात्माकता से परिपूर्ण अच्छी कहानी।
Meenakshi Gupta
बिलकुल नया नजरिया
Anju Chouhan
very nice . inspired
Usha Garg
कितना साफ व् ग्रेट निर्णय
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