इतना करीब आ के' वो' नूरे नज़र गया

राहुल द्विवेदी

इतना करीब आ के' वो' नूरे नज़र गया
(55)
पाठक संख्या − 1766
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सारांश

इतना करीब आ के' वो' नूरे नज़र गया । कमरा ये मेरे जिस्म का' खुशबू से' भर गया ।। वो इक झलक में' रूह में' ऐसे उतर गया । जैसे गुबार-ए-रौशनी' शब में बिखर गया ।। कैसी दवा है' हुस्न,नशा दौलत-औ-हुनर(दौलतो ...
Dr.Pallavi kadam
बेहद खुबसुरत रचना 👌
Ajeet Singh
lafzo ki khoobsurati ko kya piroya bhai
अनिल कुमार
बहुत बढ़िया ✍️👌👍
jyotika Rathod
super sir
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Neha Yadav
good one
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ROHIT RANA
कहीं तिनका तो कहीं किसीका चहेरा बिखर गया हुस्ने - ए - नूर का जादू तो ऐसा चला की नवाब तो क्या पूरा दरबार ही लूट गया। बहुत खूब मेरे प्यारे भाई...........
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Kajal Sahu
but......khubsurat lines hai
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