इज्जत

Damini

इज्जत
(311)
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सारांश

इज्जत दोपहर के दो बज गये थे। किशोर के स्कूल से आने का समय हो रहा था। इट से हाथ धो कर रसोई घर में चुल्हा जला कर तवा रख दिया और उसके आने की राह देखने लगी। किशोर को सीधे तवे से उतरी खाने में जो मजा आता ...
Rajendra Prasad Upadhyay
अति उत्तम रचना
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Manju Pant
मर्मस्पर्शी कहानी ।बेहतरीन ।
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mansi
Nyc
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Nisha Sori
bahut hi behtarin rachna mujhe padhne me jra deri ho gai .✍👌👌👌
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Kanta Asopa
kishor jaise yuva ki hamare desh ko sakht jarurat hai shayad aise hi log hamri betiyo ki raksha kar sakte hai nice story
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Poonam Aggarwal
मर्मस्पर्शी कहानी है दामिनी जी । परिवार में पिता की आदतें बेटे में स्वाभाविक रूप से आती हैं , ये आपने बखूबी दिखाया है । लेकिन किशोर अपने बापू के ठीक विपरीत जाकर औरत की इज़्ज़त करते हुए अपनी जान भी गवाँ देता है । यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि या तो औलाद अपने माता पिता के अनुयायी होते हैं , या उनकी बुरी आदतों से नफ़रत करते हुए ठीक उनके विपरीत बन जाते हैं उत्तम रचना ।
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rosyrose
निःशब्द
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Shelly Gupta
अति उत्तम
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Sriram Rajagopalan Iyengar
A tragic story full of emotions.. A sad ending , but that's life. A woman dies every day at the hands of men, when they insult her or mistreat her. Here she loses her child and with that her life. izzat......
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चहल राव   ♡सोना♡
बढ़िया लेखन 👌👌। इस इज्जत के नाम पर कितनी ही बहू बेटियों के साथ अत्याचार किया जाता है।कहानी बहुत अच्छी है एक ही सांस में पढ़ गई। यहां मां का विश्वास जीत गया कि उसका बेटा कुछ गलत नहीं कर सकता।
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