आ चल कुछ बातें करते हैं।

विवेक कुमार शुक्ला

आ चल कुछ बातें करते हैं।
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सारांश

आ चल कुछ बातें करते हैं, कुछ तुम कहो अपनी, कुछ हम अपनी सुनाते हैं। अजनबीयों से क्युँ बैठें, ये सफर लम्बा है रस्तों को काटने का जरीया बनाते हैं। '*शायद तुम्हारी खामिंयाँ मेरी खुबियाँ बन जाये, और ...
Shivani Thakur
Wahh bahut sundr
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Bala
बहुत ही खूबसूरत रचना👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
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दुर्गा प्रसाद
बहुत सुन्दर।👌👌👌👌👌
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Deepa Soni
शानदार रचना
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Pooja Mani
shandar
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Rajan Mishra
बहुत ही लाजवाब लिखा है आपने
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Tanu Mishta
so impressive
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Gayatri Kharate
nice1
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गोपाल यादव
शानदार रचना
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