आहों मॆ असर रखते हैं ।

सुनील आकाश

आहों  मॆ असर  रखते हैं ।
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सारांश

नालों से कुछ ना बने, आहों मॆ असर रखते हैं । आँसू पीकर मुस्करा दें, इतना तो जिगर रखते हैं ॥1॥ उधार लेकर खीर खायें, हमसे ये होता नहीं। पास मॆ कुछ ना हो, गैरत तो मगर रखते हैं॥2॥ एक रुपया मिल जाये बस उसी ...
Poonam Aggarwal
bhid khub👌👌👌
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Varsha Chaudhary
Wah wah...
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Sk kumar
बेहतरीन अल्फ़ाज़
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Himanshu Kumar
ठीक
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बृजभूषण खरे
बहुत अच्छा लिखा आपने.
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ऋषभ चोलकर
बहुत खूब आखिरी शेर तो कमाल लिखा है👌👌👌
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