आस

निधि अग्रवाल

आस
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सारांश

तक़्तीअ= 2122, 1212, 22 रदीफ़ – होता है काफिया – आर (स्वर) आस में दिल शिकार होता है यार पर ये निसार होता है गर्म हो सांस, पास हो चिलमन जान लो तब बुखार होता है क़र्ज़ मैंने अदा नहीं थे किए वो तकाज़ा उधार ...
mohit kumar
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