आरुषि की शादी

विनीत शर्मा

आरुषि की शादी
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सारांश

प्रेम विवाह या अभिश्राप, एक ज्वलंत मुद्दा - समाज के पतन की ओर अग्रसर होते कदमो की आहट को समझिए
Raghvendra Singh Rajawat
Adhunik yug ka satya...
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कांत
बेहद लाजवाब रचना 👌👌
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Namita Upadhyay
galat kya hai isme. isme kanoon ka to naam hi nahi ana chahiye. agar aap zabardasti kisi or se shadi karwa bhi denge to kaun sukhi reh payega. har insan ko pura haq hai apne bhavishya k bare mein sochne ka..
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urmila
बहुत ही ज्वलंत सवाल है,कुछ भी समाधान नही सूझ रहा है।प्रकृति को चुनौती दी जा रही है प्रकृति ही इसका उत्तर देगी
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Nandni Rajaparmar
मेरे हिसाब से सबको अपनी पसंद का पूर्ण अधिकार होना चाहिए । आपकी कहानी में आपने सिर्फ पेरेंट्स और समाज के नजरिये से देखा है। जबकि आरुषि और मयूरी का नजरिया कुछ और होता । और शायद समलैंगिगता अपराध न लगती।
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shalu choudhary
Bahut hi sahi n vashtavikta ko darshati hai kahani.. ant me sabhi k man me sawal chhod diya hai apne..
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Geeta Ved
nice story.... adhunikta ka example bahut achchha diya
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Asha Pandey
aise mata pita ke sath manmaani kar Kabhi sukoon se nahi rah sakte achi rachna
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Priyangi Minesh
agr wo pyar krti h to unka 7 de .....bs
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Shashi Shrivastava
ज्वलंत समस्या और समाधान सिर्फ चुपचाप देखना क्योंकि विरोध करने से कौन मारेगा? सुन्दर रचना. बधाई.
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