आरुषि की शादी

विनीत शर्मा

आरुषि की शादी
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सारांश

प्रेम विवाह या अभिश्राप, एक ज्वलंत मुद्दा - समाज के पतन की ओर अग्रसर होते कदमो की आहट को समझिए
Sushil Kumar
Bahut achha question kiya h aapne iss story k jariye, aise boys aur girls aisa bas selfish hoker hi kar skte hain jo na apne maa baap ke baare mein sochte hain aur na hi samaaj k baare mein, Ye sirf apna shaareerik sukh chaahte hain aur agar ye ek dusre ko chaahate hi hain toh achhe friend bankar bhi toh rah sakte hain
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Hirdesh Verma Hardyal
दुखद
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manisha
बड़े शहरों की हकीकत को आप ने बयां कर दिया है। समाज किस दिशा में जा रहा है इसका चित्रण बहुत सजीवता से किया गया है।
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Manisha Jha
bahut accha aur ekdum alag Vishay uthaya Aapne a sochne par Majboor kar dena wala Vishay acchi Rachna
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Ashish Sajwan
सर.. बहुत बेहतरीन कहानी.. आज के समाज की बहुत बड़ी समस्या को आपने अपने शब्दो के माध्यम के कागज पर उकेरा है.. बहुत सुन्दर.... ..समलैंगिकता आज के समय की सबसे भयानक स्थिति हो गई है.. कानूनी मान्यता मिलने का अर्थ यह नहीं हो सकता है कि समलैंगिक लोग प्रकृति के बनाये नियम तोड़े. लोग गलत कदम या अपराधिक कदम न उठाए इसलिए इसे कानूनी मान्यता दी गई है. लेकिन यदि दुनिया मे सभी लोग समलैंगिकता ही अपनाने लगे तो क्या होगा दुनिया का.. मै मानता हूँ कि समाज मे सबको अपने फ़ैसले खुद करने की आजादी है लेकिन इसका अर्थ यह नही है कि मनुष्य को ईश्वर के बनाये नियम तोड़ने का अधिकार है. स्त्री व पुरुष ईश्वर की रचना है. और यह एक दूसरे के पूरक हैं.. कुछ समय के लिए साथ बिताया अच्छा समय जीवन बिताने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता....
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Surendra Ubasi
bhartiye samaj ka patan hota ja raha h sarkar bhi ese kanuno ko manyeta de rahi h jo bhagwan or samaj dono ke virudh h samlengikta ka adhikar hamare samaj ke liye ek abhishap h right story
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Nandini singh
aapki kahani sach mein aaj ka sabse burning topic hai..jo aaj ki peedhi mein failti relationship ka example hai.shyad aaj humko yeh kahani sirf kahani lagey per aane wale kuch hi dino mein yeh yeh ek aam baat hogi.
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Sanjai
sacchaii ko accept kijiyey.... sbko jeeney kaa hq h.....
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Pooja Shetty
इसका जवाब शायद ही कोई मां बाप दे सके बस प्राथना ही कर सकते है की हमारे बच्चे ऐसा कदम ना उठाएं बस और जिन मा बाप ने ऐसे दिन देखे उनके लिए सहानुभूति कहानी सच में सोचने पर विवश करती है...
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KHUSHBOO THAKUR
अच्छा किया जो आपने इस कहानी का अंत नही लिखा क्योंकि सभी अपने जगह पर ठीक हैं 🙏🙏🙏
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