*आराध्या*

Anjaan

*आराध्या*
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सारांश

ये कहानी बचपन में मैंने एक बाबा से सुनी थी. लिख कर रखा था कि कभी कहानियों पर किताब लिखूंगा तो इसे जरूर शामिल करूंगा. अब लगता है कि सबकुछ अनिश्चित है... इसलिए आप के पढ़ने के लिए यहां पेश कर दिया...
गरिमा बरनवाल
बचपन से सुनी है ये कथा और जितनी बार पढ़ती हूँ ईश्वर के प्रति आस्था और प्रबल होती जाती है,कभी कभी बहुत निराश भी हो जाती हूँ पर प्रमात्मा की याद आते ही फिर से निश्चिन्त हो जाती हूँ
Raj Bhalla
बचपन में यह कहानी पिताजी के मुंह से सुनी थी फिर समय के साथ भूल गई आज आपने पुनः याद दिला दी। आभार।
Arun Kumar
लाजवाब क्या लिखा है
Neelam Dhyani
अत्यंत भावपूर्ण 🙏 परमात्मा के ऊपर विश्वास नही समर्पण की कहानी 🙏🙏🙏🙏
chavda jitu
Samiksha ke liye Shabd nahi hai, "Anupam"
puneeta
aastha se bhari sundar kahani
Mithilesh Kumari
आराध्य केलिए किया गया आभार कभी व्यर्थ नहीं जाता। ईश्वर पर विश्वास की कहानी।
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