आपसदारी

नन्द भारद्वाज

आपसदारी
(164)
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सारांश

सवेरे जब गाड़ी दादर स्टेशन पर पहुंची तो अनुराग मेरे डिब्बे के सामने ही खड़ा था। उतरते ही लपक कर उसने मुझे गले लगा लिया। हंसते-बतियाते बाहर आकर उसकी गाड़ी में अटैची रखते हुए जब उसे अपने संस्थान के ...
Abhishek Kejriwal
nice story
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Sunita Veer
Nice story
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Kajal Bagoriya
aapsi smj hi risto ko mjbut krti h bhut achhe se lekhakn kiya h aapne
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Rajendra Bisht
सधे शब्दों में आकर्षण की सीमा के पार,पल्लवित प्रेम के भावों को परिभाषित करती है आपकी रचना।नायक नायिका दोनों का संयमित आचरण, बातों का बेलौस आदान प्रदान ,तथा एक दूसरे को उसके ही दृष्टिकोण से समझने की इच्छा, जो परिपक्व प्रेम का आधार है,उस तीसरे के पत्रकार को गौण कर देता है।एक अच्छी व साफ सुंदरी कहानी के लिए धन्यवाद ।
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Anshu Agarwal
badhiya story...
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Latesh Sharma
Good
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अंशुल मढ़करीमपुर
बहुत ही दिलचस्प कहानी थी अंत तक बांधे रखा।
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$@©H!N ¥@D@√
Letter wale ke baare me kuch explain nhi kiya gaya.
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